Motivational shayari

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Motivational shayari

गम छोड़कर एक मंजर तलाश कर।
तन्हाईयों में एक लसकर तलाश कर।।

तुझे मंजिल मिल जाएगी खुद ब खुद।
तू नदी बनकर तो समंदर तलाश कर।।

उठ अभी तुझे तो चलते जाना है।

रुकना  नही गर मंजिल पाना है।।

जिंदगी कट जाती है कुछ पाने की आस में।

तन्हा ही चलना पड़ता है मंजिल की तलास में।

टूटे पैर भी लोगो के छाले भी है।

पाओगे मंजिल तो उजाले भी है।।

किस्मत के भरोसे बैठना न कभी।

लक को कुछ लोग सम्भाले भी है।



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शाम सी राह चराग बुझे लगते है।

कांटो के सफर है उलझे लगते है।।

मंजिल है उस पार ये जानता हूँ।

तभी कुछ फूल यू खिले लगते है।।

उलझन है दिलो दिमाग मे सफर करते है।

मंजिल दिखती  है  नजर जिधर करते है।।

चलो गम से अपना वास्ता तो हुआ।
कांटो भरा सही पर रास्ता तो हुआ।।



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चल रहा हूँ मै मुसलसल कभी रुका नही हूँ।
लश्कर तो बड़े देखे पर कभी झुका नही हूँ।।

ऊँचाई तलाश कर अब सारे शिकवे गिले भूला दे।
मंजिल ढूंढ कर मिलेगी तू राह में खुद को लगा दे।।

चलो छोड़ो कुछ अब बात नही करेंगे।
हम ख्वाब में भी मुलाक़ात नही करेंगे।।

खुदा नवाजता है जिसे गुरुर आ जाता है।
जवानी पर सबको ही शऊर आ जाता है।।

कितने भोले थे कभी हाथ पकड़ कर चलते थे।
अब इस जमाने का सारा फितूर आ जाता है।।

चले हैं लंबे सफर पर रास्ते में कोई मकान नहीं है।
तुम हमें खरीद रहे हो साहब ये कोई दुकान नहीं है।।

क्यों हो गमगीन यह बताओ उदासी का सबब क्या।
यह बज्मे जाना है यहां पर कोई शमशान नही है।l

ह हुस्न पर इतरा रहा है।

मैं काला हूं ये बता रहा है।।

खुदा समझ दे दे उसको।
वह मुझपर मुस्कुरा रहा है।।

 

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